भाई ने बहन की खेत में चुदाई की

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नमस्कार सबको, मैं अनिता हूँ और मेरा बड़ा भाई मनीष है। मैं 19 वर्ष की हूँ और मेरा भाई 22 वर्ष का है। वह पिता के साथ खेतों में काम करने जाता है क्योंकि उसका मन पढ़ने में नहीं लगता। ग्रेजुएशन करने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी।

मैं भी कुछ कम पढ़ा था, लेकिन मेरी माँ मुझे ग्रेजुएशन तक पढ़ाना चाहती थी। इसलिए मैं शहर में मेरी सहेली के साथ दाखिला लिया। मैं अपनी सहेली के साथ हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती हूँ। यहाँ मैं अपने भाई को बहुत याद करता हूँ। उससे दूर रहने पर मुझे उसकी तरफ अधिक आकर्षण हुआ। हम दोनों बचपन से निकट हैं।हम एक दूसरे से हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते हैं। साथ खेलते हैं, हँसते हैं और कभी-कभी एक ही कमरे में सोते हैं।

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मैं अपने भाई को इतना मिस करने लगी कि मैं उससे घंटों कॉल करने लगा। हम दोनों एक-दूसरे से बात करते हैं जैसे जीएफ-बीएफ। मेरी सहेली को लगता था कि मैं एक कॉलेज लड़के से प्यार कर रही हूँ।

जैसे, मेरी कमर गोल, भरी हुई, 34D और परफेक्ट शेप की हैं। मेरे कॉलेज के लड़कों को हमेशा घूरना चाहिए क्योंकि मेरी चिकनी, उभरी हुई और सुंदर गांड है। मेरी सहेली शायद इसलिए ऐसा सोचती होगी। पर आज तक मैंने किसी को मौका नहीं दिया। कोई चुदाई या प्रेमी नहीं। हाँ, मुझे गर्व है कि मैं कुंवारी हूँ। मैं सिर्फ अपने भाई से प्यार करने लगी।

और एक दिन जो हुआ, उसने मेरी जिंदगी बदल दी। कॉलेज की छुट्टियों में घर आने से मैं बहुत खुश था। उस दिन माँ घर का काम करती थी, जबकि पापा शहर जा रहे थे। “चल अनिता आज तुम्हे अपने खेत के मीठे-मीठे ईख चुसाऊंगा,” मेरे भाई ने कहा।” मैं भाई के साथ घूमना भी चाहता था। बाद में मैंने कहा, “हाँ भैया, आज मुझे भी गन्ना चूसने का मन हो रहा है।”” हम दोनों खेत पर पहुंचे। खेत के पास बिछी खाट पर मेरे भाई ने मुझे एक गन्ना लेकर लाया।

उस दिन मैं घुटने तक स्कर्ट और टी-शर्ट पहनी हुई थी। मेरे पैर फैलते ही मेरी रेड पैंटी दिखाई दी। भाई ने लूंगी और टी-शर्ट पहनी हुई थी। “लो अनिता, इसे अपने दांतो से छील कर चूसो, मीठा लगेगा,” वह मुझे गन्ना देते हुए कहा।” “लेकिन भैया मुझसे इतना तगड़ा गन्ना नहीं छीला जायेगा,” मैंने मुंह बनाते हुए कहा। तुम इसे अपने दांतों से छील दो, मैं इसे चूसूंगी।”

भाई भी तैयार हो गया; वह मुंह से गन्ना का छोटा टुकड़ा छीलकर मुझे देता था, जिसे मैं प्यार से चूस रहा था। जब गन्ना बहुत छोटा था, तो भाई से भी नहीं तोड़ा जा रहा था। उसने अपने दांतों से उसे तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। मैं उन्हें इतनी मेहनत करते देखकर हंस रहा था। और वे अपनी बहन के सामने लज्जित हो गए। “अनिता, देखो उड़ने वाला बंदर (दूसरी तरफ इशारा करते हुए बोले..)” उसने फिर कहा।

लेकिन यह हास्यास्पद था। “गन्ना खत्म हो गया, चलो अब घर चलो,” उसने कहा, जब तक मैं उधर देखता रहा।” जब मैंने सोचा कि भाई मजाक कर रहे थे, तो मुझे उनकी लूंगी में खड़ा हुआ उनका लंड दिखाई दिया. मुझे शरारत हुई। “ये देखो गन्ना को यहां छुपा रखा है,” मैंने कहा और लूंगी के ऊपर से उनका लंड पकड़ लिया। निकालो, मुझे चूसना है।”

“अरे अनिता, ये गन्ना नहीं है, छोड़ दो इसे,” भैया ने हैरान होकर कहा। “नहीं भैया, आज आपको मुझे ये गन्ना चुसाना ही होगा।” भाई का लंड पूरा भर गया था।भी मुझे डर था कि ये मजाक मुझे भारी न पड़े। “ठीक हो अनिता?” भाई ने पूछा। मैं आपको ये गन्ना खिलाऊंगा, लेकिन आपको आँखें बंद करनी होगी और जब तक मैं नहीं कहूँ, आँखें मत खोलना।”

आज मैं फंस गया। भाई ने मेरे सामने खड़े होकर अपनी ऊंगली से मेरा मुंह खोला, जब मैंने आँखे बंद की। फिर धीरे-धीरे अपना मोटा लंड उसमें डाला। “भैया, ये तो अजीब लग रहा है, ये क्या डाल दिया?” मैंने आँखे बंद करके भाई से पूछा। मैं अपनी आँखें खोलो तो क्या होगा?” भाई मे ने मुझे आँखें बंद करने को फिर से कहा और कहा, “अरे अनिता, इसे अच्छे से चूसो तो ये गन्ना से भी ज्यादा रसीला है।””

फिर से मुंह में डाल दिया। मैं जानता था कि आज भाई मुझे चोदेगा। मैं अपने मजाक पर भारी पड़ने वाला था। “अनिता आज तुम्हें बहुत मजा दूंगा, बस तू वहीं करती जा जो मैं तुम्हें करने को बोलता हूं,” उसने मुझे लंड चुसाते हुए कहा।”

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फिर उसने मेरे मुंह से अपना लंड निकाल लिया और मुझे खेत के बीचो-बीच में उठाया। मैं वहाँ अपनी लूंगी पर लेटा हुआ था। पहली बार मैंने उनका कठोर और बड़ा लंड देखा। “मैं जानता हूँ अनिता, तुम भी मजे लेना चाहती हो,” वे मुझे चूमकर कहा। क्योंकि तुम सब झूठ बोल रहे हो, अब खुलकर मजे ले लो।”

तब वो मेरे होंठों को चूसने लगे, और मैं खुल के साथ उनका जवाब देने लगी। मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही वे मेरी चूचियों और होंठों को चूसने लगे। फिर भाई ने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे होंठों को चूसने लगा। नंगी, गोल और सख्त मेरी चूचियां उनके सामने थीं।

मैं शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लिया। तुम बिल्कुल किसी हीरोइन की तरह लगती हो, अनिता।” “ये सब आपके लिए ही है भैया,” मैंने शर्माते हुए कहा। मैं तुमसे कब प्यार करने लगी?” मेरी बहन, कोई बात नहीं, आज तेरा भाई तुम्हें पूरा प्यार देगा।” फिर वह मेरी गांड चूसने लगा। उसने फिर मेरी पेंटी में हाथ डाला। हाथ घुसते ही उसे मालूम हुआ कि मेरी चूत बहुत गर्म और गीली हो गई थी। चूत से गर्म पानी बह रहा था।

उसने उंगली डाली और सटाक से उंगली अंदर चली गई। मेरे शरीर भी गर्म हो गया। मैं पूरी तरह से प्रसन्न हूँ। उसने फिर हाथ निकालकर मेरी चूचियों को मसलने लगा। मैं आह आह की आवाज निकालने लगा। वह भी सिसक रही थी।हम दोनों मजे ले रहे थे। गन्ने के सुनसान खेत में अपने भाई से इस तरह मजे ले रही थी, बहुत रोमांचक था।

तब मैंने पैंटी खोल दी और अपनी स्कर्ट ऊपर की ओर कर दी। वह पागलों की तरह मेरा निजी हिस्सा चाटने लगे। जब वह अपनी उंगलियां जोर से घुसाने लगा, तो उन्होंने कहा, “भैया… आआह्ह्ह्ह… हये उउउफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह..।”

उसने फिर मेरे चूत पर अपना लंड जोर से धक्का दिया। मेरी चूत उनके पूरे लंड से भर गई। पिताजी ने मेरे मुंह को हाथों से दबाया, हालांकि मैं बहुत जोर से चीखी। मैं रोने लगी, मेरी चूत फट गई और भाई का लंड खून से लाल हो गया। मुझे शांत करने के लिए वे मेरी चूचियों को सहलाने लगे। जब मैं शांत हो गया, वे धीरे-धीरे मुझे चोदने लगे।

मुझे अभी भी दर्द हो रहा था, लेकिन भाई मेरी चूचियों को चूसने लगे। कुछ देर बाद मुझे उत्साह आ गया और मैं चुदने लगी। भाई भी तेज धक्का देने लगा। मैं जोर से धक्के खाने लगी और आह आह करने लगी। मेरी चूत को उनका लंड मसल रहा था। धक्के दोनों तरफ से गर्म हो रहे थे।

हम एक-दूसरे को जितना कर सकते थे खुश कर रहे थे। तब मैं ऊपर चली गई और भैया को नीचे लेटा। उसके बाद वह उनके ऊपर ऐसे रेंगने लगी, मानो पानी से रहित मछली होती है। हम दोनों बहुत मजे से चुदाई करते रहे, और फिर मेरी चूत अपना वीर्य बाहर निकालने लगी। मैं अपनी चूत की गर्मी को शांत कर रहा था।

वह अचानक थक गए। तब हम दोनों कपड़े पहने और घर चले गए। जब मेरे पापा शाम को घर आए, तो मेरी चूत में दर्द था, तो भाई ने मुझे दवा दी। रात को जब मेरे माता-पिता सो गये, भैया मेरे कमरे में आया और फिर से मेरी सूजी हुई चूत को चोदा। मेरे मूर्ख भाई, हाय!यह कहानी आपको पसंद आई होगी, इसलिए कमेंट सेक्शन में अपनी प्रतिक्रिया दें।


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