मेरा नाम राहुल है। उम्र 21 साल। कॉलेज की पढ़ाई चल रही है। घर में सिर्फ मैं और मेरी मम्मी रहते हैं। पापा की ड्यूटी दिल्ली में है, वो महीने में एक बार ही आते हैं। मम्मी का नाम राधिका है। उम्र 42 साल। लेकिन दिखती 32-34 की लगती हैं। उनका फिगर 36-30-38 है। माँ बेटे की चुदाई
गोरी चिकनी त्वचा, भरे हुए दूध (boobs), पतली कमर और गोल-मटोल गांड। हर कोई उन्हें देखकर तारीफ करता है कि “भाभी जी तो जवान लग रही हैं”। मैं भी अंदर ही अंदर मानता था कि मम्मी बहुत हॉट हैं।
गर्मियों की छुट्टियां शुरू हुईं। जून का महीना। गर्मी बहुत तेज थी। कॉलेज बंद हो गए थे। मैं घर पर ही रहता। मम्मी भी स्कूल से छुट्टी पर थीं। एक दिन मम्मी ने कहा, “राहुल, इस बार गर्मियों की छुट्टियों में कहीं घूमने चलें? बहुत दिनों से बाहर नहीं गए।” मैंने तुरंत हामी भरी। “हाँ मम्मी, बहुत अच्छा रहेगा।”
हमने प्लान बनाया कि हिल स्टेशन पर जाएंगे। शिमला जाना तय हुआ। ट्रेन से जाना था। दो टिकट लिए – एक AC 2 टियर। लेकिन जब बुकिंग हुई तो पता चला कि सिर्फ एक ही बर्थ मिली है। ऊपरी और निचली। मैंने कहा, “मम्मी कोई बात नहीं, हम मैनेज कर लेंगे।” मम्मी ने हंसकर कहा, “हाँ बेटा, बचपन में तो तुम मेरे साथ ही सोते थे। अब भी क्या फर्क पड़ता है।”
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ट्रेन की बुकिंग हो गई। हम दोनों ने पैकिंग की। मम्मी ने अपनी पसंदीदा साड़ियां, नाइट गाउन और कुछ टाइट टॉप्स भी रख लिए। मैंने देखा तो मन ही मन सोचा – वाह, मम्मी इन छुट्टियों में तो बहुत सेक्सी लगेंगी।
ट्रेन में सफर शुरू हुआ। रात के 10 बजे हम ट्रेन में चढ़े। AC कम्पार्टमेंट में सिर्फ हम दोनों ही थे। दूसरी बर्थ खाली थी। मैंने ऊपरी बर्थ ली और मम्मी नीचे। रात को खाना खाकर हम सोने की तैयारी करने लगे। मम्मी ने साड़ी उतारी और हल्का गुलाबी नाइट गाउन पहन लिया।
वो नाइट गाउन थोड़ा पतला था। बिना ब्रा के पहना था। मैंने देखा तो मेरी सांस रुक गई। मम्मी के बड़े-बड़े दूध पूरी तरह से उभरे हुए थे। निप्पल साफ दिख रहे थे। गाउन का गला थोड़ा गहरा था। जब वो झुकीं तो पूरा गहराई तक दिख गया।
मैं बिस्तर पर लेट गया। लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बार-बार मम्मी की तरफ देखता। वो लाइट बंद करके लेट गईं। लेकिन लाइट कम थी। मैं ऊपर से झांकता रहा। मम्मी की सांसें चल रही थीं। उनका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। दूध ऐसे हिल रहे थे जैसे कोई लहरें उठ रही हों।
मेरे लंड में हलचल होने लगी। मैंने पहली बार मम्मी को इस नजर से देखा। मन में ख्याल आया – कितना मजा आएगा अगर मैं मम्मी के इन दूधों को दबाऊं, चूसूं। उनकी चूत में लंड डालकर चुदाई करूं।
मैंने खुद को समझाया – ये गलत है राहुल, वो तेरी मम्मी हैं। लेकिन जितना रोकता, उतना ही मन उकसाता। रात भर मैं जागता रहा। सुबह होते-होते मैंने ठान लिया कि इस छुट्टी में कुछ तो होगा। माँ बेटे की चुदाई
शिमला पहुंचे। हमने एक छोटा सा होटल लिया। नाम था – “हिल व्यू रिजॉर्ट”। कमरा बहुत अच्छा था। लेकिन एक ही डबल बेड था। मैंने मैनेजर से कहा, “एक्स्ट्रा बेड चाहिए।” मैनेजर ने मना कर दिया। “साहब, सीजन है, कुछ नहीं है।” मम्मी ने कहा, “कोई बात नहीं राहुल, हम दोनों एक ही बेड पर सो लेंगे। बचपन में भी तो ऐसे सोते थे।” मैंने हामी भरी लेकिन अंदर से दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
पहले दिन हमने शिमला घूमा। मॉल रोड, रिज, चर्च। मम्मी सलवार कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। कई लड़के उन्हें घूर रहे थे। मैं गर्व महसूस कर रहा था। शाम को होटल लौटे। बहुत थक गए थे। मम्मी ने कहा, “राहुल, मैं नहा लेती हूं।” वो बाथरूम में चली गईं। मैं बाहर बिस्तर पर बैठा रहा।
जब वो बाहर आईं तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। मम्मी ने सिर्फ एक टाइट टॉप और छोटी शॉर्ट्स पहनी थीं। टॉप इतना टाइट था कि दूध बाहर आने को बेताब थे। निप्पल साफ उभरे हुए। शॉर्ट्स इतनी छोटी कि उनकी गोरी जांघें पूरी दिख रही थीं। मैंने देखा तो लंड खड़ा हो गया। मैंने तुरंत तकिया अपनी गोद में रख लिया।
मम्मी हंसकर बोलीं, “क्या हुआ बेटा? इतना शर्मा क्यों रहा है?” मैंने कहा, “कुछ नहीं मम्मी, बस थक गया हूं।” वो बिस्तर पर लेट गईं। मैं भी लेट गया। लेकिन बीच में तकिया रख लिया। रात को नींद नहीं आई। मम्मी करवट लेकर सो रही थीं।
उनका टॉप थोड़ा ऊपर चढ़ गया था। पेट दिख रहा था। मैंने हाथ बढ़ाकर धीरे से उनका पेट छुआ। बहुत नरम था। मम्मी सो रही थीं। मैंने हिम्मत करके थोड़ा और ऊपर हाथ बढ़ाया। अब मेरी उंगलियां उनके दूध के नीचे थीं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
मैंने धीरे से दबाया। वाह! कितने मुलायम! जैसे कोई तकिया हो। मम्मी ने हल्की सी सिसकारी ली लेकिन सोती रहीं। मैंने फिर दबाया। इस बार ज्यादा जोर से। मम्मी की आंखें खुल गईं। मैं घबरा गया। लेकिन मम्मी ने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराईं और फिर करवट लेकर सो गईं।
अगले दिन हमने टॉय ट्रेन ली। पूरे दिन घूमे। शाम को वापस होटल। इस बार मम्मी ने कहा, “राहुल, आज मैं बहुत थक गई हूं। माँ बेटे की चुदाई | तुम मसाज कर दोगे?” मैंने हां कहा। मम्मी पेट के बल लेट गईं। मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया।
धीरे-धीरे नीचे कमर तक। फिर उनकी गांड के ऊपर। मम्मी ने कुछ नहीं कहा। मैंने हिम्मत करके शॉर्ट्स के अंदर हाथ डाला। उनकी गांड बहुत नरम थी। मैंने दबाया। मम्मी ने “आह्ह…” कहा।
फिर मैंने उन्हें पलटा। अब वो मेरे सामने थीं। मैंने उनके दूध पर हाथ रखा। टॉप के ऊपर से दबाया। मम्मी की सांसें तेज हो गईं। लेकिन वो चुप रहीं। मैं समझ गया कि मम्मी को भी अच्छा लग रहा है। लेकिन मैं रुका नहीं।
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धीरे-धीरे टॉप ऊपर किया। मम्मी के बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल। मैंने झुककर एक निप्पल मुंह में लिया। चूसने लगा। मम्मी ने मेरे सिर को पकड़ लिया। “आह्ह… राहुल… क्या कर रहे हो बेटा…” लेकिन रोक नहीं रही थीं।
मैंने दूसरा दूध भी चूसा। बहुत देर तक। मम्मी की सिसकारियां बढ़ती गईं। “उफ्फ… हाय… राहुल… इतना प्यार से…” फिर मैंने उनकी शॉर्ट्स उतारी। अंदर पैंटी भी नहीं थी। मम्मी की चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली डाली। मम्मी चीख पड़ीं – “आह्ह्ह्ह… बेटा… धीरे…”
मैंने उंगली अंदर-बाहर की। मम्मी तड़प रही थीं। फिर मैंने अपना लंड निकाला। 7 इंच लंबा, मोटा। मम्मी ने देखा तो आंखें फैल गईं। “इतना बड़ा…?” मैंने कहा, “मम्मी, अब तक इंतजार बहुत हुआ। माँ बेटे की चुदाई आज आपको पूरी तरह से अपनी बनाना है।”
मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया। मम्मी ने आंखें बंद कर लीं। “आह्ह… राहुल… अंदर डालो…” मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। मम्मी चीख पड़ीं – “आय्य्यो… मर गई…!” लेकिन फिर सिसकारी – “हाय… कितना मोटा है… चोदो बेटा… मम्मी को जोर-जोर से चोदो…”
फिर शुरू हुई असली चुदाई। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। मम्मी के दूध उछल रहे थे। मैंने उन्हें दबाया, चूसा। माँ बेटे की चुदाई मम्मी चिल्ला रही थीं – “आह्ह… हाय… चोदो… अपनी मम्मी की चूत फाड़ दो… मेरा बेटा… मेरा पति… चोदो मुझे…”
करीब 30 मिनट तक मैंने मम्मी को चोदा। कई पोजीशन बदलीं। डॉगी स्टाइल में उनकी गांड पकड़कर चोदा। मम्मी की चूत बहुत टाइट थी। फिर मैंने उन्हें गोद में उठाकर चोदा। आखिर में मैंने जोर का झटका मारा और मम्मी की चूत के अंदर ही झड़ गया। बहुत सारा पानी निकला। मम्मी भी झड़ गईं। “आह्ह्ह… राहुल… कितना गर्म पानी… मम्मी के अंदर…”
हम दोनों थककर लेट गए। मम्मी ने मेरे सीने पर सिर रखा। “राहुल… ये गलत है… लेकिन बहुत अच्छा लगा।” मैंने कहा, “मम्मी, अब ये हमारा राज रहेगा। हर छुट्टी में हम ऐसे ही चुदाई करेंगे।”
उस रात हम तीन बार और चुदाई की। सुबह तक मम्मी की चूत लाल हो गई थी। दूध पर मेरे दांतों के निशान थे। लेकिन मम्मी खुश थीं। माँ बेटे की चुदाईवापसी की ट्रेन में भी हमने बहुत मजा लिया। अब हर छुट्टी में हम अकेले घूमने जाते हैं। और हर बार मम्मी को जोर-जोर से चोदता हूं।
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