मेरा नाम अभिषेक है। मैं 19 साल का हूँ। आज मैं आपको वो सारी बात बताने जा रहा हूँ जो पिछले दो महीनों में मेरे और मेरी माँ नामामी के साथ हुई। हाँ, मेरी अपनी मम्मी। आप जो सोच रहे हो, वही हुआ। लेकिन ये सब इतनी जल्दी और इतने अजीब-अजीब हँसी-मजाक के साथ हुआ कि आज भी याद करके हँसी आती है और लंड खड़ा हो जाता है।
पापा का देहांत हुए अभी एक महीना ही हुआ था। मम्मी 38 की हैं, लेकिन लगती 30 की हैं। स्कूल में पढ़ाती हैं, साड़ी पहनती हैं, और उनके दूध… भगवान! इतने बड़े-बड़े और टाइट कि ब्लाउज फट जाए। मैं पहले कभी ऐसे नहीं सोचता था, लेकिन एक रात सब बदल गया।
उस दिन मैं कॉलेज से लेट आया। दरवाज़ा खुला था। मैंने सोचा मम्मी सो रही होंगी। लेकिन कमरे से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं। मैं चुपके से झाँका तो मेरी आँखें फट गईं।
मम्मी बिस्तर पर थीं और पड़ोस के शर्मा अंकल उन्हें चोद रहे थे।माँ की साड़ी कमर तक उठी हुई थी, ब्लाउज खुला था, और वो सिसकारी ले रही थीं – “हाँ… और ज़ोर से…”।
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उस दिन मैं कॉलेज से लेट आया। दरवाज़ा खुला था। मैंने सोचा माँ सो रही होंगी। लेकिन कमरे से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं। मैं चुपके से झाँका तो मेरी आँखें फट गईं। मम्मी बिस्तर पर थीं और पड़ोस के शर्मा अंकल उन्हें चोद रहे थे। मम्मी की साड़ी कमर तक उठी हुई थी, ब्लाउज खुला था, और वो सिसकारी ले रही थीं – “हाँ… और ज़ोर से…”।
उस दिन मैं कॉलेज से लेट आया। दरवाज़ा खुला था। मैंने सोचा मम्मी सो रही होंगी। लेकिन कमरे से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं। मैं चुपके से झाँका तो मेरी आँखें फट गईं। मम्मी बिस्तर पर थीं और पड़ोस के शर्मा अंकल उन्हें चोद रहे थे। मम्मी की साड़ी कमर तक उठी हुई थी, ब्लाउज खुला था, और वो सिसकारी ले रही थीं – “हाँ… और ज़ोर से…”।
फिर एक रात बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। मम्मी बोलीं, “अभि बेटा, डर लग रहा है, आज मेरे कमरे में सो जा।” मैं मन ही मन खुश हो गया। मम्मी गहरी नींद में थीं। साड़ी पेटीकोट ऊपर तक सरक गया था। उनकी जाँघें चाँदनी में चमक रही थीं। मैं बगल में लेटा और धीरे से अपना हाथ उनके दूध पर रख दिया।
इतने मुलायम… मैं दबाने लगा। माँ की नींद खुली। मैं डर गया, लेकिन मम्मी ने मुझे सीने से लगा लिया और फुसफुसाईं, “बेटा… रुक मत… मम्मी की चूत बहुत दिन से प्यासी है… आज तू ही बुझा दे।”
फिर एक रात बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। मम्मी बोलीं, “अभि बेटा, डर लग रहा है, आज मेरे कमरे में सो जा।” मैं मन ही मन खुश हो गया। मम्मी गहरी नींद में थीं। साड़ी पेटीकोट ऊपर तक सरक गया था। उनकी जाँघें चाँदनी में चमक रही थीं। मैं बगल में लेटा और धीरे से अपना हाथ उनके दूध पर रख दिया।
इतने मुलायम… मैं दबाने लगा। मम्मी की नींद खुली। मैं डर गया, लेकिन माँ ने मुझे सीने से लगा लिया और फुसफुसाईं, “बेटा… रुक मत… मम्मी की चूत बहुत दिन से प्यासी है… आज तू ही बुझा दे।”
मैं पागल हो गया। दोनों दूध बारी-बारी से चूसता, दबाता, काटता। मम्मी की सिसकारी कमरे में गूँज रही थी। फिर मम्मी ने मेरी पैंट नीचे की। मेरा 7 इंच का लंड देखकर बोलीं, “अरे बाप रे! तेरे पापा का तो आधा भी नहीं था… आज मम्मी की चूत फट जाएगी।” और हँस पड़ीं।
माँ ने मुझे लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गईं। मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। एक झटके में अंदर ले लिया। “आह… मादरचोद… कितना मोटा है तेरा…” माँ ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके दूध उछल रहे थे। मैंने दोनों पकड़ लिए और दबाता रहा। मम्मी चिल्ला रही थीं, “चोद बेटा… अपनी मम्मी को चोद… आज से मैं तेरी रंडी हूँ…”
हम दोनों हँस भी रहे थे और चोद भी रहे थे। मम्मी बोलीं, “बेटा, कंडोम है?” मैं बोला, “नहीं मम्मी।” वो हँसीं, “चल कोई नहीं, आज तुझे मम्मी के अंदर ही झड़ना है… मम्मी को अपना बीज दे दे।” और मैं झड़ गया… इतना स्पर्म कि मम्मी की चूत से बाहर बहने लगा। मम्मी ने उंगली से उठाया और चाट लिया। “उम्म… बेटे का माल कितना स्वादिष्ट है।”
उसके बाद तो रोज़ का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह उठते ही मम्मी मुझे बुलातीं – “अभि, मम्मी के दूध दबा दे, निप्पल खड़े हो रहे हैं।” मैं नहाने जाता तो मम्मी साथ आ जातीं। साबुन लगाते-लगाते मेरा लंड उनके मुँह में। मम्मी बहुत गंदी-गंदी बातें करतीं, लेकिन हँसते हुए।
“बेटा, आज डॉगी बन… मम्मी की गांड मार।” मैं पीछे से पेलता और मम्मी चिल्लातीं, “हाँ लोडे… अपनी मम्मी की गांड फाड़ दे…”
एक दिन तो हद हो गई। मम्मी स्कूल से आईं और बोलीं, “बेटा, आज मैंने बच्चों को छुट्टी दे दी। आज पूरा दिन तेरे लंड के नीचे रहूँगी।” और सच में, दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक हमने 6 बार चोदा। मम्मी की चूत सूज गई थी, फिर भी वो बोलीं, “एक बार और… मम्मी की चूत अभी भी भूखी है।”
फिर आया वो दिन जो आज तक मेरे दिमाग में है। मम्मी शाम को मेरे कमरे में आईं। सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में। बोलीं, “बेटा, आज मम्मी तुझे अपना पूरा खजाना दिखाएगी।” और ब्रा खोल दी। दोनों दूध ऐसे उछले जैसे बाहर आने को बेताब हों। निप्पल एकदम टाइट। मम्मी ने दोनों हाथों से दूध उठाए और मेरे मुँह के सामने लाकर बोलीं, “ले बेटा… मम्मी का दूध पी… जोर-जोर से चूस… काट भी ले…”
मैं पागल हो गया। मैंने एक दूध मुँह में लिया और इतना जोर से चूसा कि मम्मी चीख पड़ीं, “आह… मादरचोद… कितना जोर से चूसता है… मम्मी मर जाएगी…” लेकिन वो खुद अपने दूध मेरे मुँह में ठूँस रही थीं। मैं बारी-बारी दोनों चूसता रहा। मम्मी की आँखें बंद थीं, मुँह से सिर्फ़ “चूस… और चूस…” निकल रहा था।
फिर मम्मी ने मुझे बिस्तर पर धकेला। पेटीकोट ऊपर किया। पैंटी नहीं थी। चूत एकदम क्लीन शेव, गुलाबी और गीली। मम्मी मेरे ऊपर बैठ गईं और बोलीं, “आज मम्मी तेरे लंड पर पूरी तरह कब्ज़ा करेगी।” और मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाल लिया।
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फिर शुरू हुआ तूफान। मम्मी इतनी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं कि बिस्तर टूटने को था। उनके दूध मेरे मुँह पर मार रहे थे। मैंने दोनों पकड़कर दबाया तो मम्मी चीखीं, “हाँ बेटा… दूध निचोड़ दे… मम्मी का सारा दूध निकाल ले…”
मैंने माँ को नीचे लिटाया। उनके दोनों पैर कंधों पर रखे और पूरा लंड एक झटके में अंदर ठोक दिया। मम्मी की चीख निकल गई, “हरामी… मम्मी को मार डालेगा क्या… लेकिन चोद… जोर-जोर से…” मैंने स्पीड इतनी बढ़ाई कि कमरे में सिर्फ़ चप-चप और मम्मी की चीखें गूँज रही थीं। मम्मी की चूत से झाग निकल रहा था। आखिर में मम्मी बोलीं, “बेटा… अब अंदर झड़… मम्मी को अपना बच्चा दे दे…”
और मैं झड़ गया। इतना स्पर्म कि मम्मी की चूत से बाहर बहने लगा।माँ ने मुझे सीने से लगाया और रोने लगीं। बोलीं, “बेटा… तूने मम्मी को फिर से औरत बना दिया… अब मम्मी सिर्फ़ तेरी है।”
आज दो महीने हो गए। हम अब भी रोज़ चोदते हैं। मम्मी अब शर्मा अंकल को घर नहीं आने देतीं। कहती हैं, “मेरा बेटा ही मेरा मर्द है।” मैंने भी कॉलेज की सारी लड़कियों को बाय-बाय कर दिया। मम्मी ही मेरी गर्लफ्रेंड, बीवी, रंडी… सब कुछ हैं।
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