भाभी और देवर की चुदाई कहानी: फैमिली वेकेशन पर जंगली सेक्स

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नमस्कार दोस्तों, मैं हूँ राहुल, २५ साल का जवान लड़का, दिल्ली में रहता हूँ। मेरी जिंदगी में सब कुछ परफेक्ट था अच्छी जॉब, दोस्तों का ग्रुप, लेकिन असली मसाला तो मेरी भाभी सोनाली में था।सोनाली भाभी, २८ साल की, वो किसी बॉलीवुड हीरोइन से कम नहीं लगतीं। उनका फिगर ३६-२८-३६ का, गोरी चिट्टी त्वचा, लंबे काले बाल, और वो मुस्कान जो देखते ही लंड खड़ा कर दे।

भैया, यानी मेरा बड़ा भाई अजय, हमेशा बिजनेस टूर पर रहते हैं, तो घर में भाभी और देवर का रिश्ता तो बस नाम का ही रह गया। लेकिन अंदर ही अंदर, मैं तो उनकी कातिल अदाओं का दीवाना हो चुका था। हर बार जब वो साड़ी में लिपटी चाय सर्व करतीं, तो उनकी कमर की मटक, चूड़ियों की खनक, सब कुछ मुझे मदहोश कर देता।

इस साल, फैमिली वेकेशन का प्लान बना। मम्मी-पापा ने कहा, “सब लोग साथ जाएंगे, गोवा में रिलैक्स करेंगे।भैया ने हामी भर ली, लेकिन मैं जानता था कि उनका काम बीच में आ सकता है। सोनाली भाभी तो खुश हो गईं “वाह राहुल, गोवा! बीच पर घूमेंगे, वॉटर स्पोर्ट्स करेंगे।उनकी आंखों में चमक देखकर मेरा दिल धक-धक करने लगा। मन ही मन सोचा, ये ट्रिप तो मेरी किस्मत बदल देगी। भाभी और देवर की ये छुट्टी, शायद वो पल ला दे जो सालों से सपनों में आता था।

ट्रेन का सफर शुरू हुआ। हम पांच लोग मम्मी-पापा, भैया-भाभी और मैं। AC कोच में सीट्स बुक थीं। मैं और भाभी की सीट्स पास-पास। भैया विपरीत वाली बर्थ पर, मम्मी-पापा थोड़ा आगे। रात हो गई, लाइट्स डिम।

भाभी ने लाइट ब्लू सलवार-कमीज पहनी थी, जो उनके कर्व्स को हाईलाइट कर रही थी। “राहुल, सो जाओ ना, कल सुबह पहुंचेंगे,” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आवाज में वो मिठास थी जो मुझे जगाती रही।

मैंने चुपके से उनकी जांघ पर हाथ रखा, जैसे अनजाने में। वो चौंकीं, लेकिन हंस दीं “अरे देवर जी, ट्रेन हिल रही है क्या?” भाभी और देवर का ये छोटा सा टच, जैसे बिजली का करंट। मेरा लंड तन गया, पैंट में कैद। रात भर मैंने कल्पना की भाभी की चूत में मेरा लंड घुसाते हुए, उनकी चीखें सुनते हुए।

सुबह गोवा पहुंचे। होटल ‘बीच रिजॉर्ट’ बुक था, सी-फेसिंग। चेक-इन करते ही सब थक गए। मम्मी-पापा ने कहा, “तुम जवान लोग घूम आओ, हम रेस्ट करेंगे।” भैया का फोन आया “सॉरी गुड्डू, मीटिंग में फंस गया, कल आऊंगा।”

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भाभी निराश हुईं, लेकिन मैं खुश अब भाभी और देवर अकेले। “चलो भाभी, बीच चलते हैं,” मैंने कहा। वो तैयार हो गईं बिकिनी टॉप और शॉर्ट्स में। वाह! उनके बड़े-बड़े बूब्स बाहर झांक रहे थे, गांड की गोलाई शॉर्ट्स में कसी हुई।

बीच पर हमने वॉलीबॉल खेला। गेंद उनके हाथों से छूटी, मैंने पकड़ने के बहाने उनका कमर छुआ। “उफ्फ राहुल, कितना स्ट्रॉन्ग हो गया तू!” उन्होंने हंसते हुए कहा। भाभी और देवर की ये मस्ती, समंदर की लहरों जितनी उत्तेजक। दोपहर को लंच के बाद, होटल पूल साइड। मम्मी-पापा कमरे में सो रहे थे। भाभी ने स्विमसूट पहना रेड कलर का, जो उनके बॉडी को और हॉट बना रहा था। मैंने भी ट्रंक पहना। पूल में कूदे।

पानी में खेलते-खेलते, मैंने उन्हें गुदगुदी कर दी। वो हंस-हंसकर तड़पीं, “बस कर देवर, डूब जाऊंगी!” लेकिन उनकी आंखों में शरारत थी। अचानक मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया, मेरा सख्त लंड उनकी गांड से सटा। वो सिहर गईं “राहुल… ये क्या?” लेकिन पीछे हटीं नहीं। भाभी और देवर का ये गुप्त स्पर्श, पूल के पानी में घुल गया। शाम को सनसेट देखा।

बीच पर अकेले बैठे, वो बोलीं, “तेरा भैया कभी टाइम नहीं देता। तू तो हमेशा साथ रहता है।” मैंने उनका हाथ थामा “भाभी, मैं तो आपका गुलाम हूँ।” उनकी उंगलियां मेरी में उलझ गईं। रात को डिनर पर, वाइन ऑर्डर की। मम्मी-पापा जल्दी सो गए।

भाभी और मैं बालकनी में। “राहुल, गोवा की हवा में कुछ तो जादू है,” उन्होंने कहा, चश्मा उतारकर। मैं करीब आया, उनके होंठों पर किस करने को जी चाहा। लेकिन रुका अभी वक्त है।

दूसरा दिन। भैया अभी नहीं आए। मम्मी-पापा ने लोकल टूर लिया ओल्ड गोवा घूमने। हम दोनों फ्री। “चलो भाभी, प्राइवेट बीच पर चलें,” मैंने कहा। स्कूटर लिया, मैंने ड्राइव किया। रास्ते में हवा उनके बाल उड़ा रही थी।

बीच पहुंचे – वीरान, सिर्फ हम। वो बिकिनी में लेटीं, सनस्क्रीन लगाने को कहा। मैंने उनके पीठ पर मालिश शुरू की। हाथ फिसले, कमर तक। “आह… राहुल, कितना अच्छा लग रहा है,” उनकी सिसकी। मेरा हाथ नीचे सरका, गांड पर। वो मुड़ीं “देवर, ये तो गलत है।” लेकिन आंखें बंद।

मैंने झुककर उनके होंठ चूसे। पहला किस मीठा, गर्म। भाभी और देवर का ये पहला पाप, समंदर गवाह। वो भी किस देने लगीं, जीभ लड़ाई। मेरे हाथ उनके बूब्स पर निप्पल्स सख्त। “भाभी, आप कितनी हॉट हो!” मैंने कहा। वो शरमाईं, लेकिन खींच लिया। रेत पर लेटे, मैंने उनका टॉप खोला। बड़े-बड़े स्तन बाहर गुलाबी निप्पल्स। चूसे, काटे। वो कराहने लगीं “उम्म… देवर, मार डालोगे।” मेरा लंड ट्रंक फाड़ने को।

अचानक वो उठीं – “नहीं राहुल, यहां नहीं। होटल चल।” स्कूटर पर वापस। रास्ते में उनका हाथ मेरी जांघ पर। होटल पहुंचे, लिफ्ट में ही किस शुरू। कमरा खोला, दरवाजा बंद होते ही मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। “भाभी, आज तो मैं आपको चोदूंगा!” आक्रामक आवाज में।

वो हांफ रही थीं “हाँ देवर, चोद अपनी भाभी को। तेरे भैया ने तो सालों से संतुष्ट नहीं किया।” मैंने उनकी कमीज फाड़ दी। ब्रा खोली, बूब्स चूसे। कचोटे, चूमा। नीचे हाथ पैंटी गीली। उंगली डाली चूत में “आह! कितनी टाइट है भाभी।” वो चीखीं “धीरे… साले, फाड़ देगा क्या?” लेकिन कमर हिलाने लगीं। मैंने पैंटी उतारी।

उनकी चूत गुलाबी, रस टपकती। घुटनों पर बैठा, चाटी। जीभ अंदर-बाहर। वो बाल खींचने लगीं “चाट देवर, चूत चाट अपनी भाभी की।” भाभी और देवर की ये चूत चाटना, स्वर्ग सा।

मैं खड़ा हुआ, ट्रंक उतारा। मेरा ८ इंच का मोटा लंड बाहर सुपाड़ा चमकता। भाभी ने पकड़ा “वाह! इतना बड़ा? तेरे भैया का तो आधा भी नहीं।” मुंह में लिया, चूसी। गले तक। मैं कराहा – “हाँ भाभी, चूसो।” लेकिन रुका नहीं। उन्हें बेड पर फेंका। टांगें फैलाईं, लंड चूत पर रगड़ा। “डालो ना राहुल, चोदो!” वो गिड़गिड़ाईं।

एक झटके में अंदर आधा घुसा। वो चीखीं “आह! दर्द हो रहा।” लेकिन मैं रुका नहीं। पूरा धक्का चूत फटने लगी। “चोद लौड़े, जोर से चोद!” गालियां देने लगीं। मैंने स्पीड बढ़ाई धड़-धड़। बेड हिल रहा। उनके बूब्स उछल रहे।

“हाँ भाभी, तेरी चूत कितनी कसी हुई।” पसीना टपक रहा। १० मिनट बाद वो झड़ीं “आ गया… उफ्फ!” चूत सिकुड़ गई, मेरा लंड दबा। लेकिन मैं नहीं रुका। पोजीशन बदली डॉगी स्टाइल। गांड पकड़ी, पीछे से पेला। “मारो देवर, गांड मारो!” वो चिल्लाईं। स्लैप मारा गांड पर लाल हो गई। भाभी और देवर की ये आक्रामक चुदाई, कमरे में गूंज रही।

फिर मिशनरी। टांगें कंधे पर, गहराई से। “भाभी, तू मेरी रंडी है आज से।” मैंने कहा। वो हंस दीं – “हाँ देवर, तेरी ही रंडी। भर दे मुझे।” आखिर में झड़ गया – गर्म वीर्य चूत में। हम दोनों पड़े रहे, हांफते। “राहुल, ये तो कमाल था,” उन्होंने कहा, मेरे सीने पर सिर रखकर।

लेकिन ये तो शुरुआत थी। शाम को मम्मी-पापा लौटे, कुछ न पता। रात को डिनर के बाद, बालकनी में फिर किस। “कल भैया आएंगे, लेकिन रात में आना मेरे कमरे,” भाभी ने फुसफुसाया। भाभी और देवर का ये राज, गोवा की रातों में छिपा।

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तीसरा दिन। भैया पहुंचे। फैमिली टूर – बॉट ट्रिप। लेकिन मेरी नजरें भाभी पर। वो शरमातीं, लेकिन आंखों से इशारा। रात को सब सोए। मैं चुपके उनके कमरे। भैया नेट पर लगे। दरवाजा खुला। अंदर घुसा, भाभी बेड पर नंगी। “जल्दी देवर, चोद दे,” वो बोलीं।

मैंने लंड बाहर किया, मुंह में। चूसा। फिर चूत में। लेकिन तेज – भैया जाग न जाएं। ५ मिनट में झड़े। बाहर आया, दिल धड़कता। भाभी और देवर की ये चोरी की चुदाई, खतरे का रोमांच।

चौथा दिन। मम्मी-पापा शॉपिंग गए। भैया मीटिंग। हम फिर अकेले। होटल के प्राइवेट सूट में शिफ्ट। “आज पूरा दिन,” मैंने कहा। भाभी ने साड़ी पहनी ट्रांसपेरेंट। “चोदो मुझे देवर, हर तरह से।” शुरू किया किस से। होंठ, गर्दन, बूब्स। निप्पल्स काटे – खून निकल आया।

“आह! साडू, दर्द दे रहा।” लेकिन वो और उत्तेजित। चूत चाटी, उंगली डाली स्पॉट मसला। वो दो बार झड़ीं। फिर लंड अंदर। मिशनरी, काउगर्ल, रिवर्स। हर पोजीशन। “जोर से चोद, फाड़ दे चूत!” चीखें। मैंने बाल खींचे, गला दबाया आक्रामक। गांड में उंगली।

“नहीं… वहां नहीं,” लेकिन मैंने ट्राई किया। लुब्रिकेंट लगाया, धीरे से। “आह! देवर, तू पागल है।” लेकिन अंदर गया। गांड चोदी – टाइट। वो रोने लगीं, लेकिन मजा आया। “हाँ, चोद गांड भी!” भाभी और देवर की ये एनल चुदाई, पहली बार। दो घंटे चले। थक गए।

शाम को बीच पर। सूरज डूबते देखा, नंगे। समंदर में चुदाई लहरें साक्षी। पानी में खड़े, लंड अंदर। “उफ्फ… ये तो जन्नत है,” वो बोलीं। रात को पार्टी। डांस फ्लोर पर। भाभी का बॉडी टच। होटल बैक, फिर सेक्स। भैया सोए, हम बाथरूम में। शावर के नीचे स्लिपरी बॉडी। लंड चूत में, दीवार से सटाकर। “चोद लौड़े, कभी न रुको।” गालियां, थप्पड़। आक्रामक, जंगली।

ट्रिप खत्म होने को। आखिरी रात। फैमिली डिनर। लेकिन डिनर के बाद, भाभी ने कहा “आखिरी बार, जोरदार।” कमरे में। बेड शीट्स फाड़ दी। बॉन्डेज – स्कार्फ से हाथ बांधे। चाबुक की तरह थप्पड़। “रंडी भाभी, चोदूंगा तुझे!” मैं चिल्लाया। वो गिड़गिड़ाईं “हाँ मालिक, चोदो अपनी गुलाम को।” चूत, गांड, मुंह – सब भरा। तीन बार झड़े। सुबह तक। भाभी और देवर की ये विदाई चुदाई, यादगार।

वापसी के सफर में, ट्रेन में फिर टच। घर पहुंचे। लेकिन रिश्ता बदल गया। अब हर मौके पर भैया के बाहर होने पर। गोवा ने हमें जो दिया, वो जिंदगी भर। दोस्तों, ये थी भाभी और देवर की वो हॉट वेकेशन स्टोरी।


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